Ganapati Atharvasirsha, No. 1 Most Poweful Vedic Mantra

Ganapati Atharvasirsha Poweful Vedic Mantra Lyrics

।। গণপতি অথর্ব শীর্ষম ।।

৷৷ গণপতি অথর্ব শীর্ষম ৷৷

ও নমস্তে গণপতয়ে ।

ত্বমেব প্রত্যক্ষ তত্ত্বমসি ।

ত্বমেব কেবলং কর্তাসি ।

ত্বমেব কেবলং ধর্তাসি ॥

ত্বমেব কেবলং হর্তাসি ।

ত্বমেব সর্বং খল্বিদং ব্রহ্মাসি ।

তং সাক্ষাদাত্মাসি নিত্যম্ ॥ ১

ঋতং বচমি । সত্যং বচমি || ২

Ganapati Atharvasirsha In Bengali Script

অব ত্বং মাম। অব বক্তারম। অব শ্রোতারম।অব দাতারম । অব ধাতারম্ । অবানূচানমব শিষ্যম ।অব পশ্চাত্তাত । অব পুরস্তাত। অবােত্তরাত ।অব দক্ষিণাতাত । অব চোৰ্ধাত্তাত।অবোধরাত্তাত । সর্বতাে মাং পাহি পাহি সমন্তাত ৷৷ ৩৷৷

ত্বং বাঙময়সত্বং চিন্ময়ঃ । ত্বমানন্দময়সত্বং ব্রহ্মময়ঃ । ৪

Ganapati Atharvasirsha PDF

ত্বং সচ্চিদানন্দাদ্বিতীয়ােসি । ত্বং প্রত্যক্ষং ব্রহ্মাসি।ত্বং জ্ঞানময়াে বিজ্ঞানময়ােসি ৷৷ ৪সর্বং জগদিদং ত্বত্তো জায়তে । সর্বৎ জগদিদং ত্বত্তস্তিষ্ঠতিসর্বং জগদিদং তুয়ি লয়মেষ্যতি । সর্বং জগদিদং ত্বয়ি প্রত্যেতি ।ত্বং ভূমিরােপোনলোSনিলো নভঃ । ত্বং চত্বারি বাকপদানি ॥ ৫

ত্বং গুণত্রয়াতীতঃ । ত্বং অবস্থাত্রয়াতীতঃ । ত্বং দেহত্ৰয়াতীতঃ ।ত্বং কালত্রয়াতীতঃ । ত্বং মূলাধারস্থিতোসি নিত্যম ।ত্বং শক্তিত্রয়াত্মকঃ । ত্বং যােগিনো ধ্যায়ন্তি নিত্যম ।ত্বং ব্রহ্মা ত্বং বিষ্ণুত্বং রুদ্রস্তমিন্দ্রস্তমগ্নিত্বং বায়ুত্বং সূর্যস্তংচন্দ্রমাত্বং ব্ৰহ্ম ভূর্ভুবঃ স্বরোম ৷৷ ৬

Ganapati Atharvasirsha In Bengali Lyrics

গণাদিং পূর্বমুচ্চার্য বণদিীং স্তদনস্তর। অনুস্বারঃ পরতরঃ ।অর্ধেংদুলসিতম । তারেণ ঋদ্ধম। এতত্তব মনুস্বরূপম্।গকারঃ পূর্বরূপম । অকারো মধ্যমরূপম । অনুস্বারশ্চাত্ত্যরূপম ।বিন্দুরুত্তরূপম । নাদঃ সন্ধানম্ । সংহিতা সন্ধিঃ ।সৈষা গণেশবিদ্যা । গণক ঋষিঃ । নিচৃদগায়ত্ৰীচ্ছন্দঃ ।গণপতিদেবতা। ও গং গণপতয়ে নমঃ ৷৷ ৭

একদন্তায় বিদ্মহে বক্রতুণ্ডায় ধীমহি ।তন্নো দন্তিঃ প্রচোদয়াৎ || ৮

Ganapati Atharvasirsha

একদন্তং চতুর্হস্তং পাশমংকুশধারিণম্ ।রং চ বরদং হস্তৈর্বিভ্রাণং মুষকধজম্ ।রক্তং লম্বােদরং শূপকর্ণকং রক্তবাসসম্ ।রক্তগন্ধানুলিপ্তাংগং রক্তপুস্পৈঃ সুপুজিতম্ ।ভক্তানুকম্পিং দেবং জগকারণমচ্যুতং ।আর্বিভূতং চ সৃষ্ট্যাদৌ প্ৰকৃতেঃ পুরুষাতপরম্ ।এবং ধ্যায়তি তাে নিত্যং স য়ােগী য়ােগিনাং বরঃ ॥ ৯

Ganapati Atharvasirsha In Bengali

নমাে ব্রাতপতয়ে। নমাে গণপতয়ে। নমঃ প্রমথপতয়ে ।নমস্তে অস্তু লম্বােদরায়ৈকদন্তায় বিঘ্ননাশিনেশিবসুতায় বরদমূর্তয়ে নমঃ ॥ ১০

এতদথর্বশীর্ষং য়োSধীতে স ব্রহ্মভূয়ায় কল্পতে ।স সর্ববিঘ্নৈন বাধ্যতে । স সর্বত্র সুখমেধতে ।স পঞ্চমহাপাপাত প্রমুচ্যতে।সায়মধীয়ানাে দিবসকৃতং পাপং নাশয়তি ।প্রাতরধীয়াননা রাত্রিকৃতং পাপং নাশয়তি ।সায়ং প্রাতঃ প্রয়ঞ্জানাে পাপােপাপাে ভবতি ।সর্বত্রাধীয়ানােSপবিঘ্নো ভবতি । ধর্মার্থকামমােক্ষং চ বিন্দতি ।ইদমথর্বশীর্ষমশিষ্যায় ন দেয়ম্ ।যাে যদি মােহাদ দাস্যতি স পাপীয়ান ভবতি ।সহস্রাবর্তনাদ্যং য়ং কামমধীতে তং তমনেন সাধয়েত্ ॥ ১১

Ganapati Atharvasirsha

অনেন গণপতিমভিষিংচতি স বাগ্মী ভবতি ।চতুথ্যামনশনন্ জপতি স বিদ্যাবান ভবতি ।ইত্যথর্বণবাক্যম। ব্রহ্মাদ্যাবরণং বিদ্যান বিভেতি কদাচনেতি ।।| ১২

Ganapati Atharvasirsha In Bengali

যাে দূর্বাংকুর্যৈজতি স বৈশ্রবণপম ভবতি ।যাে লাজৈর্যজতি স যশােবান ভবতি । স মেধাবান ভবতি ।যাে মােদকসহস্রেণ যজতি স বাংছিতফলমবাপ্নোতি ।যঃ সাজ্য সমিদ্ভিরযজতি স সর্বং লভতে স সর্বং লভতে । ১৩

Ganapati Atharvasirsha

অষ্টৌ ব্রাহ্মণান সম্যগ গ্রাহয়িত্বা সূৰ্যবৰ্চস্বী ভবতি ।সুর্যগ্রহে মহানদ্যাং প্রতিমাসন্নিধৌ বা জপত্বা সিদ্ধমংত্রো ভবতি ।মহাবিদ্যাত প্রমুচ্যতে । মহা দোষাত প্রমুচ্যতে ।মহাপ্রত্যবায়াত প্রমুচ্যতে । স সর্ববিদ্ভবতি স সর্ববিদ্ভবতি ।

য় এবং বেদ । ইত্যুপনিষত্ ৷৷ ১৪ ৷৷

ওঁ শান্তিঃ শান্তিঃ শান্তিঃ ৷৷

Ganapati Atharvashirsham Vedam World

Ganapati Atharvashirsham Vedam World

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

1. गणपति अथर्वशीर्षम्ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः। भद्रं पश्येमाक्ष-भिर्यजत्राः।स्थिरैरङ्गै-स्तुष्टुवागं सस्तनूभिः। व्यशेम देवहितं यदायुः।स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।स्वस्ति नस्ताक्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि।त्वमेव केवलं कर्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्तीऽसि।त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥१॥

ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि॥२॥

Ganapati Atharvasirsha

अव त्वं माम्। अव वक्तारम् । अव श्रोतारम् । अव दातारम् ।अवधातारम् । अवानूचानमव शिष्यम्। अव पश्चात्तात्।अव पुरस्तात्। अवोत्तरात्तात्। अव दक्षिणात्तात्।अब चोर्ध्वात्तात्। अवाधरात्तात्।सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात्॥३॥

त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः। त्वमानन्द-मयस्त्वं ब्रह्ममयः।त्वं सच्चिदानन्दा-ऽद्वितीयोऽसि। त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।त्वं ज्ञानमयो विज्ञान-मयोऽसि॥४॥

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते। सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति। सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।त्वं भूमिरापो-ऽनलोऽनिलो नभः। त्वं चत्वारि वाक्पदानि॥५॥

त्वं गुणत्रयातीतः। त्वं अवस्था-त्रयातीतः। त्वं देहत्रयातीतः।त्वं कालत्रयातीतः। त्वं मूलाधार-स्थितोऽसि नित्यम्।त्वं शक्तित्रयात्मकः। त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम्।त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्व-मिन्द्रस्त्व-मग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं भूर्भुवः स्वरोम्।गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादी स्तदनन्तरम्।अनुस्वारः परतरः। अर्धेन्दुलसितम्। तारेण ऋद्धम्।एतत्तव मनुस्वरूपम्॥६॥

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

गकार: पूर्वरूपम्। अकारो मध्येम-रूपम्।अनुस्वार-श्चान्त्य-रूपम्। बिन्दुरुत्तर-रूपम्।नादः सन्धानम्। सगंहिता सन्धिः।सैषा गणेश-विद्या। गणक ऋषिः।निद्गायत्री-च्छन्दः। गणपति-देवता। ॐ गं गणपतये नमः॥७॥

एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥८॥

Ganapati Atharvasirsha

एकदन्तं चतुर्हस्तं पाशमङ्कुश-धारिणम्।रदै च वरदं हस्तैर्बिभ्राण मूषक-ध्वजम्॥ रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकै रक्तवाससम्॥रक्तगन्धानु-लिप्ताङ्गं रक्तपुष्पैः सुपूजितम्॥भक्तानु-कम्पिनं देवं जगत्कारण-मच्युतम्।आविर्भूतं च सृष्ट्यादौ प्रकृते : पुरुषात्परम्।एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वरः॥९॥

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

नमो व्रातपतये। नमो गणपतये। नमः प्रमथपतये।नमस्तेऽस्तु लम्बोदरायैक-दन्ताय विघ्ननाशिने शिवसुताय वरदमूर्तयेनमः॥१०॥

एतदथर्व-शीर्ष योऽधीते स ब्रह्मभूयाय कल्पते।स सर्वविघ्नैर्न बाध्यते। स सर्वत्र सुखमेधते।स पञ्च महापापात्प्रमुच्यते॥११॥

Ganapati Atharvasirsha

सायमधीयानो दिवसकतं पापं नाशयति।

प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।

सायं प्रातः प्रयुञ्जानो पापोऽपापो भवति।

सर्वत्राधीयानो ऽपविघ्नो भवति।

धर्मार्थ-काममोक्षं च विन्दति॥१२॥

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

इदमथर्व-शीर्षम-शिष्यायनदेयम्

यो यदि मोहाद्दास्यति स पापीयान् भवति।

सहस्रा-वर्तनाद्यं यं कार्ममधीते तं तमनेन साधयेत्॥१३॥

अनेन गणपतिर्म-भिषिञ्चति स वाग्मी भवति।

चतुर्थ्या-मननन् जपति स विद्यावान् भवति। इत्यथर्वण-वाक्यम्।

ब्रह्माद्या-वरणं विद्यान्न बिभेति कदाचनेति॥१४॥

Ganapati Atharvasirsha

यो दूर्वांङ्कुरै-य॑जति स वैश्रवणोपमो भवति।

योलाजैर्यजति स यशोवान् भवति। स मेधावान् भवति।

यो मोदक-सहस्रेण यजति स वाच्छित-फलम-वाप्नोति।

Ganapati Atharvasirsha in Hindi

यःसाज्य समिद्भि-य॒जति स सर्वं लभते स सर्वं लभते॥१५॥

अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग् ग्राहयित्वा सूर्यवर्चस्वी भवति।

सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमा-सन्निधौ वा जप्त्वा सिद्धमन्त्रो

भवति॥१६॥

Ganapati Atharvasirsha

महाविघ्नात्प्रमुच्यते। महादोषात्प्रमुच्यते।

महाप्रत्यवायात्प्रमुच्यते। स सर्वविद्भवति स सर्वविद्भवति।

य एवं वेद। इत्युपनिषत्॥१७॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

(भूमिका – हम गणेशजी का आराधना पूर्वक, गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करते हैं।ऋषि अथर्व जिन्होंने गणेशजी का साक्षात्कार किया था, अपने अनुभव को हमारे हितमें इस रूप में प्रकट किया है। अथर्व ऋषि का कथन इस तरह है।)हे देव, हम कानों से शुभ सुनें। हम यजन करते हुए अपनी आँखों से शुभ देखें। हमस्वस्थ शरीर के द्वारा तुम्हारी आराधना करें। हम जीवन पर्यन्त देवहित का ही आचरणकरें। कीर्तिप्रद इन्द्र हमारा कल्याण करें। सर्वविद सूर्य हमारा हित करें। बुराइयों केअपहर्ता गरुड़ हमारा भला करें। बृहस्पति हमारा हित साधन करें।। शरीर, मन औरआत्मा शान्त हों। गणपति को नमस्कार। तुम साक्षात् परम तत्व हो। मात्र तुम्हीं ने संसार की सृष्टि की है।मात्र तुम्हीं संसार का पोषण करते हो। मात्र तुम्हीं संसार के संहारक हो। मात्र

Ganapati Atharvashirsha benefits

तुम्हीसम्पूर्ण सृष्टि के परमब्रह्म हो। तुम्हीं साक्षात् नित्य आत्मा हो।।१।।

मैं ऋत कहता हूँ। मैं सत्य कहता हूँ।।२।।

तुम मेरी रक्षा करो। अपने उपासक की रक्षा करो। उत्तम श्रोता की रक्षा करो। मुझ दानकरने वाले की रक्षा करो। मुझ उपासना करने वाले की रक्षा करो। अपने सभी वेदपाठीशिष्यों की रक्षा करो। मेरी पृष्ठभाग से रक्षा करो। मेरी सामने से रक्षा करो। मेरी उत्तर सेरक्षा करो। मेरी दक्षिण से रक्षा करो। मेरी ऊपर से रक्षा करो। मेरी नीचे से रक्षा करो। मेरीसभी बाधाओं से एवं समस्त दिशाओं में रक्षा करो।।३।।

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

तुम्हीं वाणी और तुम्हीं चेतना हो। तुम आनन्दमय और तुम्ही ब्रह्ममय हो। तुम्हींसच्चिदानन्द हो, अन्य कोई नहीं। तुम प्रत्यक्ष ब्रह्म हो। तुम ज्ञानमय और विज्ञानमयहो।॥४॥

सम्पूर्ण संसार तुम्हीं से उत्पन्न होता है। सम्पूर्ण संसार तुम्हीं में स्थित है। सम्पूर्ण संसार है तुम्हीं में लीन होगा। सम्पूर्ण संसार तुम्हारा ही प्रकट स्वरूप है। तुम भूमि, जल, अग्नि,वायु और आकाश हो। तुम वाणी के चारों रूप हो।।५।।

Ganapati Atharvasirsha

तुम तीनों गुणों से परे हो। तुम चेतना के तीनों स्वरों से परे हो। तुम तीनों शरीरों से परे हो।तुम तीनों कालों से परे हो। तुम निरन्तर मूलाधार चक्र में व्याप्त हो। तुम त्रिधात्मकशक्ति हो। योगीजन निरन्तर तुम्हारा ध्यान घरते हैं। तुम ब्रह्मा हो, तुम विष्णु हो, तुमनहो, तुम इन्द्र हो, तुम अग्नि हो, तुम वायु हो, तुम सूर्य हो, तुम चन्द्रमा हो, तुम ब्रहलोकव्याप्त और अध्यात्म हो। “गं” आदि में उच्चारित कर “अ” वर्ण बाद में कोअनुस्वार इसके बाद उच्चरित किया जाए। अर्धचन्द्राकार से उसे संवारे। बिन्दुविस्तार दें।।६।।

‘ग” कार पूर्व रूप है। “अ” कार मध्य रूप है। अनुस्वार अन्त्य रूप है। विन्दु उत्तर रूपहै। नाद सन्धान है। यही गणेश विद्या है। इसके ऋषि गणक हैं। इसका छन्द निवृत्गायत्री है। देवता गणपति हैं। ओम् गं गणपति को नमस्कार||७||

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

मैं एक दांत और टेढ़ी सूण्ड वाले देवता(गणेश) की आराधना करता हूँ। मुझे सुप्रेरितकर ज्ञान प्रदान करें।।

जिनका एक दांत है, चार हाथों में पाश, अंकुश और अभय मुद्रा है। जिनके हाथसफलता और वरदान देते है। जिनकी मूषक ध्वजा है। जिनका वर्ण लाल है, पेट बड़ा है,कान सूप जैसे हैं तथा लाल वस्त्र पहनते हैं। जिनके शरीर में लाल चन्दन लिपटा हुआ हैतथा जिनकी लाल पुष्पों से पूजा की जाती है। भक्तों पर अनुकम्पा करने वाले देवता(गणेश) जगत अविनाशी कारण हैं। उनका आविर्भाव सृष्टि के उद्गम के पूर्व भी था। वेप्रकृति और पुरुष के परे अवस्थित हैं। जो उनकी इस रूप में निरन्तर आराधना करता है,वह योगियों में श्रेष्ठ योगी है।।९।।

Ganapati Atharvasirsha

सभी देवों के स्वामी को नमस्कार। सभी गणों के स्वामी को नमस्कार। सभी जीवधारियोंके स्वामी को नमस्कार। बड़े पेट वाले, एक दांत वाले, विघ्न विनाशक, शंकर के पुत्र,वर प्रदान करने वाले मंगलमूर्ति(गणेशजी) को नमस्कार।।१०।।

जो इस अथर्वशीर्ष का अध्ययन करता है वह ब्रह्म स्वरुप को प्राप्त होता है। वह सर्वत्रसुख प्राप्ति करता है। उसे किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होती। वह पांच प्रकार के पापों(ब्रह्महत्या, सुरापान, गुरुस्त्री गमन, सुवर्ण चोरी एवं ऐसा करने वालों की संगति करनेवालों से मित्रता) से मुक्त होता है।।११।।

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

सायंकाल में पाठ करने से दिन में किए हुए पापों का नाश होता है। प्रात:काल में पाठ

करने से रात्री में किए हुए पापों का नाश होता है। इस तरह सायंकाल और प्रात:काल

में पठन करने से मनुष्य सम्पूर्ण निष्पाप होता है। सर्वत्र पठन करने वाला निर्विघ्न

होता है तथा उसे चतुर्विध पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का लाभ मिलता

है।।१२।।

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

श्रद्धा व आदर न होने वाले किसी व्यक्ति अथवा शिष्य को यह अथर्वशीर्ष नहीं

सिखाया जाय। किसी द्रव्य लोभादि मोह के कारण सिखाने पर वह पापी होगा। इसके

सहस्रावर्तन(१००० बार पाठ) करने पर उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।।१३।।

जो इस अथर्वशीर्ष से गणेशजी को अभिषेक करता है वह उत्तम वक्ता होता है। जो

चतुर्थी को उपवास करते हुए पूरे दिनभर उसका पाठ अथवा जाप करता है, वह विद्या

सम्पन्न होता है, ऐसा अथर्वऋषि का वचन है। इसलिए वह विश्वसनीय है। वह निर्भय

होता है।।१४।।

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

जो दूर्वांकुरों (द्रूप, दूप या दूबी)से हवन करता है, वह कुबेर के समान धनवान होता है।

जो साल अर्थात् खील या चांवल की धानी से हवन करता है वह सर्वत्र यशस्वी एवं

बुद्धिमान होता है। जो सहस्र मोदकों का अथर्वशीर्ष के मंत्रों से होम करता है उसे अपना

इष्ट फल प्राप्त होता है, उसे सबकुछ प्राप्त होता है।।१५।।

Ganapati Atharvasirsha Meaning in Hindi

आठ ब्राह्मणों को उत्तम रीति से यह अथर्वशीर्ष सिखाने वाला सूर्य के समान तेजस्वी

होता है। सूर्य ग्रहण काल में गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा इत्यादि महानदियों के

किनारों अथवा तीर्थस्थलों पर गणेशजी की मूर्तियों के सम्मुख यदि इसका पाठ अथवा

जाप किया जाय तो वह सिद्धमन्त्र होता है (मन्त्र में दी गई फल प्राप्ती तत्काल प्राप्त होने

का सामर्थ्य जिसे प्राप्त होता है वह सिद्धमन्त्र बोला जाय)।१६।।

Ganapati Atharvasirsha

वह जपकर्ता महाविघ्नों, महादोषों तथा उसी तरह महासंकटों से भी मुक्त होता है। जो

इसे इस तरह जानता है वह सर्वज्ञानी होता है वह सर्वज्ञानी होता है। यह वेदों का कथन

है।।१८।।

Share Now:

Sairam, my name is P. Mishra. I am a Graduate student & also i am learning Vedic mantra last 5 years.

Leave a Comment